
गणगौर पर्व पर आस्था व भक्ति से सराबोर हुआ शहर,रनुबाई-धनियर राजा के रथों को लेकर गांधी पहुंचे भक्त,

-विसर्जन से पूर्व जवारों के पूजन के लिए उमड़ा जनसैलाब,
खंडवा। अतिथि आवभगत के बाद दूसरे दिन जवारों का विधिपूर्ण ढंग से विसर्जन कर अंतिम विदाई दी गई। शहर के अलावा पूरे निमाड़ में आस्था के चलते वातावरण गणगौरमयी हो गया। गुलाल की बौछार व मदमस्त बैंड पर माता के गीतों की सुमधुर धुनें दर्शनार्थियों को सहसा ही अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। आस्था भरे माहौल में जवारों का पूजन कर गणगौर घाट पर विसर्जन किया गया। म्हारी रणुबाई सासर जाए जैसे गीत गाती महिलाओं ने जवारों का विसर्जन किया।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि रविवार शाम शहर के सभी रथों को गांधी भवन लाया गया। जहां उन्हें एकत्रित कर कतारबद्ध रूप से मातारूपी जवारे रख उनका पूजन कर रथों को सिर पर रखते हुए गणगौर घाट व अन्य विसर्जन स्थलों पर विसर्जन किया गया। इसके अलावा निमाड़ के ग्रामीण अंचलों में भी गणगौर पर्व की धूम रही। शहर की अपेक्षा ग्रामों में आस्था का माहौल अधिक रहा। जवारों को गले लगाकर दोनों हाथों से नदियों में विसर्जित किया गया। सुनील जैन ने बताया कि विसर्जन के पूर्व जिन लोगों ने माता के रथ मन्नत लेकर बौड़ाए उन लोगों द्वारा माता को प्रसादी का भोग लगाकर नवदम्पत्ति जोड़ों को न्यौता देकर मेहमान नवाजी की जाएगी।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि शहर भर के सैकड़ों रथ विसर्जन के पूर्व गांधी भवन में एकत्रित हुए। जहां पर पूजन व आरती के बाद उन्हें विसर्जन स्थल गणगौर घाट तक ले जाया गया। एक-एक कर एकत्रित हुए रनुबाई व धनियर राजा के रथों से पूरा गांधी भवन आस्था व भक्ति से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं द्वारा हलवे की प्रसादी के साथ-साथ धानी के प्रसाद का भी वितरण किया किया गया। पुण्य लाभ लेने के लिए रास्तेभर कई स्थानों पर पानी, शरबत व अन्य प्रसादी का वितरण श्रद्धालुओं द्वारा नि:स्वार्थ भाव से किया गया।
शहर की मुख्य बाडिय़ों से जुड़े सभी रथ एकत्रित होकर गाजे-बाजे के साथ नाचते गाते हुए गांधी भवन पहुंचे। जहां पर मन्नत व बिना मन्नत वाले रथों को एक साथ पूजा गया। आदरभाव पूर्वक पूजने के बाद रथों को लेकर चलने वालों के पैरों के नीचे चादर व टाट पट्टी रखी गई ताकि उनके पैर जमीन को न छू सके। गांधी भवन से चल समारोह के रूप में निकले रथ जब तक घर तक वापस नहीं पहुंच जाते तब तक यह प्रक्रिया जारी रहती है।
प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी कहारवाड़ी एवं गुरुवा मोहल्ला गली में कहार गुरुवा समाज द्वारा गणगौर माता के झूले बांधे गए। विसर्जन के एक दिन पूर्व माता को जोड़े सहित झूलों में बैठाकर झूला दिया गया। क्षेत्र में श्रद्धा और भक्ति की एक अनूठी ही मिसाल देखने को मिलती है।
इस महापर्व पर माता के प्रति अपार आस्था रखने वाले भक्तों, समाज, संगठनों व अन्य संस्थाओं द्वारा शहरभर में विभिन्न स्थानों पर बुधवार को भी भंडारे आयोजित हुए और सोमवार को भी होंगे भंडारे। भक्तों द्वारा खीर साग, पुड़ी के साथ ज्वार की रोटी अमाडी की भाजी व अन्य व्यंजन बनाकर प्रसादी का वितरण किया गया। शहर के अलावा ग्रामीण अंचलों में भी माता के भंडारे आयोजित होंगे। ग्रामीण भी भक्ति का परिचय देते हुए इन आयोजनों में अपार श्रद्धा के साथ भाग लिया।









